सिद्धार्थ कांकरिया @ थांदला
थांदला। थांदला के तेरापंथ भवन में इन दिनों तेरापंथ धर्म संघ के यशस्वी आचार्य श्री महाश्रमणजी के शिष्य मुनि श्री कोमल कुमारजी और मुनि श्री सिद्धार्थ कुमार जी विराजित है। संतो के सानिध्य में प्रतिदिन तेरापंथ भवन में धर्म आराधनाएं हो रही है।

शुक्रवार को मुनि श्री कोमल कुमारजी द्वारा थांदला की संस्कार पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों को मार्गदर्शन दिया गया। इस अवसर पर मुनि श्री कोमल कुमारजी ने कहा कि विनय ही धर्म और शिक्षा का मूल आधार है। विद्यार्थियों को हमेशा विनय अर्थात ‘ग्रहण’ करने की मुद्रा में रहना चाहिए। विद्यार्थी जीवन सीखने (ग्रहण) का जीवन है। इस जीवन में सिखाई गई। प्रत्येक बाद विद्यार्थियों को हमेशा स्मरण रहती है। विनयवान विद्यार्थी ही अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है। मुनिश्री ने विद्यार्थियों को अनुशासन, संगठन और शिक्षा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने जीवन में ध्यान और विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। और विद्यार्थियों को उत्कृष्ट कार्य करने हेतु प्रेरित किया।
इसके पूर्व गुरुवार को तेरापंथ सभा भवन में आयोजित धार्मिक सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री कोमल कुमार जी ने बताया कि सुख, वैभव, धन, समृद्धि का एक ही मार्ग है। धर्म धर्म अपना कर ही व्यक्ति आत्मिक शांति प्राप्त कर सकता है।
संत दर्शन करने हेतु थांदला में विभिन्न स्थानों से श्रद्धालु भी प्रतिदिन आ रहे हैं। वहीं कई श्रद्धालु उपवास व्रत भी रख रहे हैं।


