सिद्धार्थ कांकरिया@ थांदला
डूंगर मालवा में थांदला नगरी को धर्म नगरी के रूप में पहचाना जाता है। इसी भूमि पर जैनाचार्य पूज्य गुरुभगवन्त उमेशमुनिजी म.सा. “अणु” ने जन्म लेकर जिन शासन के गौरव को बढ़ाया है। आपकी ही छत्रछाया में पले बढ़े आपके ही सुशिष्य बुद्धपुत्र प्रवर्तक श्री जिनेन्द्रमुनिजी के आज्ञानुवर्ती तत्वज्ञ श्री धर्मेंद्रमुनिजी म.सा. व पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. के पावन सानिध्य में वर्ष 2026 के धर्मोत्कर्ष तत्वज्ञ वर्षावास में थांदला संघ में जहाँ एक ओर हर घर में तपस्या का माहौल है वही तप से बच्चों ने भी जिन शासन को महका दिया है। नन्ही प्रिशा अमित शाहजी व चार्मी श्रेयांश बाठिया ने 11-11उपवास की कठोर साधना की वही अब तक 12 मासक्षमण पहले ही पूर्ण हो चुके है वही धर्मनिष्ठ सुश्राविका आरती लवी श्रीश्रीमाल ने 54 उपवास की कठोर तपस्या पूर्ण कर इतिहास रच दिया है। थांदला के ज्ञात इतिहास में इतनी बड़ी तपस्या पहली बार पूर्ण हुई है। तपस्वी पूर्व में दो मासक्षमण सहित अनेक प्रकार की तपस्या कर चुकी है। जिन शासन में तपस्या को कर्म निर्जरा का महत्वपूर्ण साधन माना गया है जिसका अनुसरण धैर्य व आत्मशक्तिवान आत्मा ही कर पाती है ऐसे में कोई विरली आत्मा ही होती है जो 54 दिवस तक सीमित मात्रा में महज गर्म जल के आधार पर रहकर दीर्घ तप को पूर्ण कर सके।
संघ बहुमान से पूर्व सादगी से निकली जयकार यात्रा
ऐसे विशिष्ट दीर्घ तप के अनुमोदन में श्रीसंघ ने सादगी पूर्ण तरीके से आरम्भ-समारम्भ किये बिना ही संघ के वरिष्ठ रमेशचंद्र श्री श्रीमाल के आवास से जयकार यात्रा निकाली जिसमें शामिल श्रावक-श्राविकाओं ने
तप व तपस्वी संग गुरुभगवंतों के जयकारें लगाते हुए पूरा वातावरण गुंजायमान कर दिया। जयकार यात्रा स्थानीय महावीर भवन पर गुणानुवाद सभा में परिवर्तित हो गई जहाँ तप अनुमोदन में तत्वज्ञ श्री धर्मेन्द्रमुनिजी, रोचकवक्ता श्री सन्दीपमुनिजी व पूज्या श्री निखिलशीलाजी म.सा. ने तपस्या पर आधारित जिनवाणी फरमाते हुए तपस्वी के तप का गुणानुवाद करते हुए तप में सहायक परिवारजनों को भी इस कठोर तप में सहयोग देने के लिए धन्यवाद दिया। 54 उपवास की कठिन तपस्या के उपलक्ष में बड़ी संख्या में श्रावक श्राविकाओं ने गुरुभगवंतों से आजीवन अथवा अपने सामार्थ्य अनुसार 54 दिवस तक विविध नियम प्रत्याख्यान ग्रहण किये। सभा में श्री संघ के अध्यक्ष प्रदीप गादिया ने श्रीसंघ कि ओर से दीर्घ तपस्वी बहन को संघ विशिष्ट तप आराधिका के अलंकरण से अलंकृत करते हुए प्रिशा व चार्मी सहित सभी बाल तपस्वियों की विशेष प्रसंशा की। साथ ही धर्मदास गण के अध्यक्ष भरत भंसाली, हेमंत श्री श्रीमार ने अपने विचार व्यक्त किए व तपस्वी को खूब खूब धन्यवाद दिया। श्रीसंघ व संघ की समस्त संस्थाओं के पदाधिकारियों व सदस्यों ने तपस्वी के आवास पर पहुंचकर उनके तप की खूब खूब अनुमोदना की। इस अवसर पर अपनी तपस्या पूर्ण कर चुके सभी तपस्वियों के तप की बोली तप से लगाकर श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ की ओर से बहुमान कर अभिनंदन पत्र भेंट किया गया। तपस्वी का कई परिवारों व विभिन्न संस्थाओं द्वारा भी बहुमान किया गया। इस दौरान धर्मसभा में श्रावक-श्राविकाओं ने मुक्त कंठ से तपस्वी के जयकारे लगाए। संचालन श्री संघ सचिव हितेश शाहजी ने किया। वर्षावास के दौरान बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उत्साह व जिज्ञासापूर्वक धर्म एवं तप आराधना में रमण कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि यहाँ अभी तक 13 मासक्षमण के साथ दों सिद्धि तप सहित कई तपस्याएं पूर्ण हो चुकी है वही कई तपस्वी मासक्षमण तप की ओर अग्रसर हो रहे हैं। उक्त जानकारी संघ प्रवक्ता पवन नाहर ने दी।


