सिद्धार्थ कांकरिया @ थांदला
थांदला। मानसून का समय आ चुका है। इन दिनों थांदला में खाद और बीज की दुकानों पर कृषकों की भीड़ देखी जा रही है। किसान वर्षभर अच्छी फसल की आस लिए खेत को तैयार करने में लग गया है। ऐसे में सबसे ज्यादा समस्या किसानों को बीज के लिए आ रही है। थांदला जो कि नकली बीजों का हब बनता जा रहा है। पिछले वर्ष भी यहां पर नकली बीजों के प्रकरण दर्ज हुए थे। ऐसी किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर सोमवार को आदिवासी युवा क्रांति संघ ने एक ज्ञापन अनुविभागीय अधिकारी तरुण जैन को सौंपा है।
ज्ञापन देते हुए संघ के सदस्यों ने बताया कि थांदला बाजार में अमानक नकली बीच प्रचलित है। जिन्हें अप्रशिक्षित लोगों के द्वारा सिर्फ अधिक दाम कमाने के लिए विक्रय किया जा रहा है। साथ ही कपास, मक्का, सोयाबीन आदि बीजो की जो थैली पर अधिक खुदरा मूल्य (एमआरपी) लिखी रहती है। उससे तीन गुना ज्यादा पैसा किसानों से बीज व्यापारी ले रहे हैं।
वहीं फसल बोवनी के बाद किसानों को खाद और दवाई की भी जरूरत पड़ती है। वह खाद भी विक्रेताओं द्वारा एमआरपी से अधिक पैसे लेकर दी जाती है। ऐसे में आदिवासी हर प्रकार से ठगा जा रहा है। किसानों के साथ कालाबाजारी करते हुए व्यापारी धोखाधड़ी करते हैं।
थांदला में ऐसी दुकानें भी संचालित है जो लाइसेंसधारी नहीं है। संघ ने ज्ञापन देते हुए प्रशासन से मांग की है कि वह किसानों के हित में हस्तक्षेप करें। कालाबाजारी करने वाले व्यापारियों को नियमानुसार कार्रवाई करें। अन्यथा संगठन द्वारा पूरे क्षेत्र में आंदोलन किया जाएगा।
इस अवसर पर आदिवासी युवा क्रांति संघ के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।


